राष्ट्रीय शिक्षा नीति प्रणाली (NEP) 2020 in Hindi pdf | NEP के नियम, विशेषताएं, और उद्देश्य क्या हैं

राष्ट्रीय शिक्षा नीति प्रणाली (NEP) 2020 in Hindi pdf | NEP के नियम, विशेषताएं, और उद्देश्य क्या हैं 

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राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 NEP in hindi : इस नई शिक्षा नीति 3 साल पूरे हो गये हैं इसके माध्यम से कक्षा 1 से 5 तक की कक्षायों में उन्हें उनकी मातृभाषा में अध्ययन कराया जायेगा जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में पठन-पाठन में छात्रों की रूचि बढ़े और वे ज्यादा से ज्यादा लाभान्वित हों।

शिक्षा के माध्यम से ही एक मानव की क्षमता का सर्वांगीण विकास होता है। राष्ट्रीय विकास को बढ़ावा देने के लिए शिक्षा अत्यंत आवश्यक है । शिक्षा के माध्यम से ही किसी देश /समाज और मानव का सर्वोपरि विकास किया जा सकता है शिक्षा के माध्यम से किसी देश की आर्थिक स्थिति मजबूत की जा सकती है 

राष्ट्रीय शिक्षा नीति- 2020 - 21वीं शताब्दी की पहली शिक्षा नीति है जिसका लक्ष्य हमारा देश के विकास के लिए अनिवार्य आवश्यकताओं को पूरा करना है । राष्ट्रीय शिक्षा नीति भारत की परंपरा और सांस्कृतिक मूल्यों के आधार को बरकरार रखते हुए 21वीं सदी की शिक्षा के लिए आकांक्षात्मक लक्ष्य की पूर्ति करता है। शिक्षा की पिछली नीतियों का उद्देश्य मुख्य रूप से शिक्षा में पहुंच बनाना हैं ।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति सन 1986 ईo में लागू किया गया था जिसका संसोधन सन 1992 में किया गया। सन 1992 में शिक्षा को निशुल्क और अनिवार्य किया गया 2009 ईo में इसे अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम किया गया लेकिन फिर यह अधूरा रहा इसके बाद सन 2020 में इसकी पूरी परिकाष्ठा एक बार पुनः बदली गयी।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति प्रणाली के प्रमुख उद्देश्य


इसका उद्देश्य लोगों को तैयार करना है जो संविधान द्वारा परिकल्पित समावेशी और बोलता वादी समाज के निर्माण में योगदान दे सकें एक अच्छी शिक्षण का उद्देश्य वही होना चाहिए जहाँ सभी छात्रों का अभिवादन हो उस संस्थान का वातावरण प्रत्येक छात्र के हित में हो। संस्थान का मुख्य कार्य प्रेरणादायक और छात्रों को सीखने के लिए भरपूर सुगम सामग्री उपलब्ध रहे। यही नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति का प्रमुख उद्देश्य है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति प्रणाली का उद्देश्य अच्छे इंसानों का विकास करना है जो तर्कसंगत विचार और कार्य करने में सक्षम हो जिसमें करुणा और सहानुभूति साथ ही लचीलापन, वैज्ञानिक चिंतन, रचनात्मक कल्पना शक्ति नैतिक मूल्य और आधार हो ।इसका उद्देश्य ऐसे उत्पादक लोगों को तैयार करना है जो संविधान द्वारा परिकल्पित समावेशी और बहुलतावादी समाज के निर्माण में योगदान दे सकें।

एक अच्छी शिक्षण संस्थान वे हैं जो प्रत्येक छात्र का स्वागत करें तथा सुरक्षित एवं प्रेरणादायक वातावरण मिल सके। जहाँ छात्रों को सीखने के लिए अनुभव बुनियादी ढांचे और उपयुक्त संसाधन प्राप्त हो सके। शिक्षा के स्तर का सहज एवं समन्वय आवश्यक हैराष्ट्रीय शिक्षा नीति एक परिचय शिक्षा से मानव की क्षमता का सर्वांगीण विकास होता है।

राष्ट्रीय विकास को बढ़ावा देने के लिए शिक्षा अत्यंत आवश्यक है शिक्षा व माध्यम है जिससे देश की समृद्धि प्रतिभा और संसाधनों का सर्वोत्तम विकास संवर्धन किया जाता है राशि शिक्षा नीति 2020 21वीं शताब्दी की पहली शिक्षा नीति है जिसका लक्ष्य हमारा देश के विकास के लिए अनिवार्य आवश्यकताओं को पूरा करना है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की विशेषताएं 


राष्ट्रीय शिक्षा नीति भारत की परंपरा और सांस्कृतिक मूल्यों के आधार को बरकरार रखते हुए 21वीं सदी की शिक्षा के लिए आकांक्षा लक्ष्य की पूर्ति करता है शिक्षा की पिछली नीतियों का उद्देश्य मुख्य रूप से शिक्षा की पहुंच बनाती हैं 1986 की राष्ट्रीय शिक्षा नीति जिसे 1992 में संशोधित किया गया था इसके अधूरे कार्य को राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 द्वारा पूरा पूरी की गई है।

1986 1992 की पिछली नीति के बाद से एक बड़ा कदम निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 जिसने सार्वभौमिक प्रारंभिक शिक्षा सुलभ कराने हेतु कानूनी आधार उपलब्ध करवाया राष्ट्रीय शिक्षा नीति प्रणाली का उद्देश्य अच्छे इंसानों का विकास करना है जो तर्कसंगत विचार और कार्य करने में सक्षम हो जिसमें करुणा और सहानुभूति सास और लचीलापन वैज्ञानिक चिंतन रचनात्मक कल्पना शक्ति नैतिक मूल्य और आधार हो।


नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रमुख सिद्धांत


  1. प्रत्येक बच्चे की विशेष दक्षता की पहचान करना और उसके अनुरूप उसे और आगे तक विकसित करना।
  2. बुनियादी साक्षरता और संख्या ज्ञान को सर्वाधिक प्राथमिकता देना।
  3. लचीलापन
  4. पाठ्यक्रम पर आधारित कला और विज्ञान के बीच गतिविधियों के साथ-साथ शैक्षणिक कार्यों के बीच ताल मेल अनिवार्य रूप से स्थापित रहना चाहिए।
  5. अवधारणात्मक समाज पर जोर।
  6. रचनात्मक एवं तार्किक सोच।
  7. बहुभाषिकता।
  8. जीवन कौशल का विकास।सीखने के लिए सतत मूल्यांकन पर जोर देना।
  9.  शिक्षा के स्तर को विकसित करने के लिए तकनीकी के उपयोग पर जोर दिया जाना। 

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रमुख नियम



राष्ट्रीय शिक्षा नीति 10+2 वाली स्कूल व्यवस्था को उसे 3 से 18 वर्ष के सभी बच्चों के लिए पाठ्यचर्या और शिक्षण शास्त्रीय आधार पर 5+ 3 + 3 +4 की एक नई व्यवस्था को पुनर्गठित करने की बात करती है ।

वर्तमान में उसे 6 वर्ष की उम्र के बच्चे 10 +2 वाले ढांचे में शामिल नहीं हैं क्योंकि 6 वर्ष के बच्चों को कक्षा 1 में प्रवेश दिया जाता है।

नए 5+3+3+4 ढांचे में 3 वर्ष के बच्चों को शामिल कर प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल औरशिक्षा ECCE कि एक मजबूत बुनियाद को शामिल किया गया है।

राज्य और जिला स्तर पर दिव्यांग व्यक्तियों के सशक्तीकरण से जुड़े सिविल सोसायटी संगठन / सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभागों के प्रशिक्षित और योग्य सामाजिक कार्यकर्ता राज्य / केन्द्र शासित प्रदेश सरकारों द्वारा अपनाए गए विभिन्न नवीन तंत्रों के माध्यम से इस आवश्यक कार्य को करने में स्कूलों से जुड़े हो सकते हैं।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति- 2020 का विजन 

इस महत्वपूर्ण मिशन में शिक्षकों का सहयोग करने के लिए सभी व्यावहारिक तरीकों का पता लगाया जाएगा। दुनिया भर के अध्ययन से पता चलता है कि जब सहपाठी एक-दूसरे से सीखते- सिखाते हैं यह काफी प्रभावी होता है। इस प्रकार, प्रशिक्षित शिक्षकों की देखरेख में और सुरक्षा पहलुओं का उचित ध्यान रखकर साथी छात्रों के लिए पियर ट्यूटरिंग को एक स्वैच्छिक और आनंदपूर्ण गतिविधि के रूप में लिया जा सकता है।

स्थानीय और गैर-स्थानीय दोनों प्रकार के प्रशिक्षित वोलेंटियर्स के लिए इस बड़े पैमाने के अभियान में भाग लेना बहुत आसान बनाया जायेगा। ताकि हर बच्चों का विकास बेहतर हो सके।

सभी भारतीय और स्थानीय भाषायों में दिलचस्प और प्रेरणादायक बाल साहित्य और सभी स्तर के विद्यार्थियों के लिए स्कूल और स्थानीय पुस्तकालयों में बड़ी मात्रा में पुस्तकें उपलब्ध करायी जाएँगी जिसके लिए आवश्यकतानुसार उच्चतर गुणवत्ता के अनुवाद (आवश्यकतानुसार तकनीकी मदद से भी करवाए जायेंगे।

देश भर में पढ़ने की संस्कृति के निर्माण के लिए सार्वजनिक और स्कूल पुस्तकालयों का विस्तार किया जाएगा। डिजिटल पुस्तकालय भी स्थापित किये जायेंगे। गांवों में स्कूल लाइब्रेरी की स्थापना से समुदाय को भी लाभ होगा जो स्कूली समय के पश्चात् उसका लाभ ले सकते हैं।

बुक क्लब के सदस्य इन स्कूली / सार्वजनिक लाइब्रेरी में मिल सकते हैं जिससे पढ़ने की संस्कृति को प्रोत्साहन मिलेगा। एक राष्ट्रीय पुस्तक संवर्धन नीति तैयार की जाएगी और सभी स्थानों, भाषाओं, स्तरों और शैलियों में पुस्तकों की उपलब्धता, पहुँच, गुणवत्ता और पाठकों को सुनिश्चित करने के लिए व्यापक पहल की जाएगी।

कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता वाली समिति की रिपोर्ट पर आधारित है। नई शिक्षा नीति नया इतिहास लिखने के लिए तैयार है। 30 साल के बाद हमारी शिक्षा में सुधार हेतु आज सरकार जागी है।

स्कूली शिक्षा प्रणाली के प्राथमिक लक्ष्यों में हमें यह सुनिश्चित करना है कि बच्चों का स्कूल में नामांकन हो और उन्हें नियमित रूप से विद्यालय भेजा जाए।

सर्व शिक्षा अभियान (अब समग्र शिक्षा) और शिक्षा का अधिकार अधिनियम जैसी पहल के माध्यम से भारत ने हाल के वर्षों में प्राथमिक शिक्षा में लगभग सभी बच्चों का नामांकन प्राप्त करने में उल्लेखनीय प्रगति की है। हालांकि, बाद के आंकड़े बच्चों के स्कूली व्यवस्था में ठहराव संबंधी कुछ गंभीर मुद्दों की ओर इशारा करते हैं।

कक्षा छठी से आठवीं का जीईआर 90.9 प्रतिशत है, जबकि कक्षा 9-10 और 11-12 के लिए यह क्रमशः केवल 79.3% और 56.5% है। यह आंकड़े यह दर्शतं हैं कि किस प्रकार से कक्षा 5 और विशेष रूप से कक्षा 8 के बाद नामांकित छात्रों का एक महत्वपूर्ण अनुपात शिक्षा प्रणाली से बाहर हो जाता है।

वर्ष 2017-18 में एनएसएसओ के 75वें राउंड हाऊसहोल्ड सर्वे के अनुसार, 6 से 17 वर्ष के बीच की उम्र के विद्यालय न जाने वाले बच्चों की संख्या 3.22 करोड़ है। इन बच्चों को यथासंभव पुनः शिक्षा प्रणाली में शीघ्र वापस लाना देश की सर्वोच्च प्राथमिकता होगी।

इसके साथ ही 2030 तक प्री स्कूल से माध्यमिक स्तर में 100% सकल नामांकन अनुपात प्राप्त करने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ना होगा और भविष्य के छात्रों का ड्रॉपआउट दर भी कम करना होगा। पूर्व-प्राथमिक से कक्षा 12 तक की शिक्षा व्यावसायिक शिक्षा सहित देश के सभी बच्चों को सार्वभौमिक पहुंच और अवसर प्रदान करने के लिए एक ठोस राष्ट्रीय प्रयास किया जाएगा।

अक्सर फिनलैंड की शिक्षा की तारीफ करते हैं परंतु अपनी शिक्षा प्रणाली में फेरबदल करने से डरते हैं आज वह समय आ गया है जब नए फेरबदल की बेहद आवश्यकता है।

नई शिक्षा नीति 2020 (NEP) के लागू होने से लाभ 

  1. नई शिक्षा नीति शिक्षार्थियों के एकीकृत विकास पर केंद्रित है। यह 10+2 सिस्टम को 5+3+3+4 संरचना के साथ बदल देता है, जिसमें 12 साल की स्कूली शिक्षा और 3 साल की प्री-स्कूलिंग होती है, इस प्रकार बच्चों को पहले चरण में स्कूली शिक्षा का अनुभव होता है।
  2. परीक्षाएं केवल 3, 5 और 8वीं कक्षा में आयोजित की जाएंगी, अन्य कक्षाओं का परिणाम नियमित मूल्यांकन के तौर पर लिए जाएंगे। बोर्ड परीक्षा को भी आसान बनाया जाएगा 
  3. कुल मिलाकर दो पहल की जाएँगी जिससे बच्चों का विद्यालय में वापसी और आगे के बच्चों को ड्रॉपआउट होने से रोका जा सके। पहला प्रभावी और पर्याप्त बुनियादी ढाँचा प्रदान करता है ताकि सभी छात्रों को इसके माध्यम से प्री-प्राइमरी स्कूल से कक्षा 12 तक सभी स्तरों पर सुरक्षित और आकर्षक स्कूली शिक्षा प्राप्त हो सके।
  4. प्रत्येक स्तर पर नियमित प्रशिक्षित शिक्षक उपलब्ध कराने के अलावा विशेष देखभाल की जाए ताकि यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी स्कूल में अवस्थापना की कमी न हो । 
  5. सरकार एनआरएफ (नेशनल रिसर्च फाउंडेशन) की स्थापना करके विश्वविद्यालय और कॉलेज स्तर पर अनुसंधान और नवाचारों के नए तरीके स्थापित करेगी। आइए मिलकर नई शिक्षा नीति का स्वागत करते हैं साथ ही साथ अपने बच्चों के सुनहरे भविष्य की संकल्पना करते है
  6. विविध परिस्थितियों में स्कूल छोड़ने वाले बच्चों को मुख्यधारा शिक्षा में वापस लाने के लिए सिविल समाज के सहयोग से वैकल्पिक और नवीन शिक्षा केंद्र स्थापित किए जाएँगे।
  7. स्कूलों में सभी बच्चों की सहभागिता सुनिश्चित हो, इसके लिए बहुत ध्यान से सभी विद्यार्थियों की ट्रैकिंग करनी होगी, साथ-साथ उनके सीखने के स्तर पर भी नज़र रखनी होगी
  8. यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि वे स्कूल में दाखिला ले रहे हैं और उपस्थित हो रहे हैं या नहीं ड्रॉपआउट बच्चों के लौटने और यदि वे पीछे रह गए हैं तो उन्हें पुनः मुख्य धारा से जोड़ने के लिए पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध करायी जाएंगी ।
  9. फाउंडेशनल स्टेज से लेकर कक्षा 12 तक की स्कूली शिक्षा के जरिये 18 वर्ष की आयु तक सभी बच्चों को समान गुणवत्ता वाली शिक्षा प्रदान करने के लिए बुनियादी सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
  10. प्रशिक्षित शिक्षकों और कार्मिकों की भर्ती विद्यालय में की जाएगी जिससे शिक्षक हमेशा छात्रों और उसके अभिभावक के साथ कार्य कर सकें। इसके साथ यह भी सुनिश्चित किया जा सके कि सभी विद्यार्थी विद्यालय आ रहे हैं और सीख रहे हैं।

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