Meena Manch ka Gathan | मीना मंच का गठन कैसे करें | Meena manch register | मीना मंच की बैठक

Meena Manch ka Gathan | Meena manch register | मीना मंच की बैठक गतिविधि | बाल संसद का गठन कैसे करें 

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अन्तर्गत सामाजिक और आर्थिक ubi दृष्टि से वंचित समूहों (एसईडीजी) पर विशेष बल दिया गया है, जिनमें बालक-बालिका, सामाजिक-सांस्कृतिक और भौगोलिक संबंधी विशिष्ट पहचान एवं दिव्यांगता शामिल हैं।

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मीना मंच की बैठक गतिविधि व बाल संसद का गठन कैसे करें

'NEP 2020' के लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु वर्ष 2023-24 में पॉवर एंजिल्स का सशक्तिकरण करते हुये उनके नेतृत्व में प्रदेश में वृहद स्तर पर जन-अभियान चलानें की कार्ययोजना विकसित की जा रही है।

मीना मंच कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य

  • 8-14 आयु वर्ग की सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से वंचित समस्त बालिकाओं को विद्यालय में नामांकित करानें और उनकी निरंतरता बनाये रखनें।
  • शत प्रतिशत ट्रांजीशन, बालिकाओं की सुरक्षा, जीवन कौशल का विकास, सशक्तिकरण एवं संपूर्ण विकास के लिये समस्त प्राथमिक विद्यालयों / उच्च प्राथमिक विद्यालयों एवं केजीबीवी में कार्यक्रम संचालित किये जाने है।

मीना मंच में पॉवर एंजिल भूमिका 

1. उत्तर प्रदेश शासन के जारी गाइडलाइन के अनुसार पॉवर एंजिल अपने कक्षा की हर छात्रा से बराबर सम्पर्क रखेगी और उनसे उचित व्यवहार तथा किसी प्रकार के आचरण एवं दुर्व्यवहार के प्रति सतर्क रहने हेतु लिए सलाह देगी

2. किसी भी छात्रा द्वारा ऐसी किसी भी घटना से ग्रसित अथवा सामना होने पर उनके द्वारा यह सूचना पॉवर एन्जिल को दी जाएगी। पॉवर एन्जिल द्वारा सम्बन्धित छात्रा को यथा परामर्श देते हुए तत्सम्बन्धित जानकारी उसके द्वारा तुरन्त कक्षाध्यापक / कक्षाध्यापिका, प्रधानाध्यापक / प्रधानाध्यापिका को दी जाएगी।

3. ऐसी बालिकाएं जो अक्सर कक्षा में अनुपस्थित रहती हैं, उनकी विद्यालय में उपस्थिति हेतु उनके अभिभावकों से संपर्क कर उनकी समस्या का निदान करेंगी।

4. समय-समय पर पॉवर एन्जिल को विद्यालय के सुगमकर्ता / जिला समन्वयक बालिका शिक्षा द्वारा पृथक से मार्गदर्शन प्रदान किया जाए। मीना सभा में इस सम्बन्ध में बालिकाओं को आवश्यक जानकारियां प्रदान की जाये।

5. छात्राओं को नियमित विद्यालय लाने के लिये प्रत्येक माह के अंतिम कार्य दिवस के दिन शिक्षण कार्य के उपरांत पॉवर एन्जिल के नेतृत्व में ठहराव परिक्रमा का आयोजन किया जाये।

6. ठहराव परिक्रमा के अंतर्गत बच्चों की रैली को निकालते हुये उन बच्चों के घरों का भ्रमण किया जाये, जिनकी सूची बनायी गयी है तथा उनके अभिभावकों से संवाद स्थापित किया जाय।

मीना मंच का संचालक 

मीना मंच की सुगमकर्ता मीना मंच की गतिविधियों को संचालित करने के लिए विद्यालय की एक अध्यापिका को सुगमकर्ता के रूप में नामित किया जाये विद्यालय में महिला अध्यापिका न होने की दशा में सक्रिय पुरुष अध्यापक का चयन किया जाये।

सुगमकर्ता का यह दायित्व होगा कि वह मीना मंच सम्बन्धी समस्त गतिविधियों का आयोजन कराये, कार्यक्रम का दस्तावेजीकरण करें। 

मीना मंच के सुगमकर्ता की प्रत्येक त्रैमास बीआरसी स्तर पर बैठक कर कार्यक्रम की गहन समीक्षा की जाये। बैठक में मीना मंच द्वारा किए गये कार्य की समीक्षा तथा आगामी तीन माह की योजना तैयार की जाये।

प्राथमिक विद्यालयों में बाल संसद गठन प्रक्रिया

बाल संसद में प्रधानमंत्री, उप प्रधानमंत्री सहित 7 मंत्रिमण्डल होंगें, जिसका नेतृत्व मंत्री एवं उप-मंत्री द्वारा किया जायेगा। प्रत्येक सदन में मंत्री एवं उप मंत्री के अतिरिक्त 4 सहयोगी सदस्य (2 बालक. 2 बालिकाएं ) होगें। इन विभागों के संरक्षण का दायित्व अध्यापक का होगा।

 बाल संसद का गठन एवं कार्य निम्नवत् होगा

  • विद्यालय में बच्चों को 7 सदनों में विभाजित करना । प्रत्येक सदन के लिए एक सदन प्रमुख और एक सह प्रमुख होगा जिसमें एक बालिका होगी
  • बच्चों में उनकी जिम्मेदारियों को पूर्ण करने हेतु समय समय पर उनके कार्यों का अवलोकन, विश्लेषण तथा सहयोग करें। विश्लेषण के आधार पर जिम्मेदारियों को बांटते समय बच्चों का बदल-बदल कर चयन करें।
  • प्राथमिक विद्यालयों में बाल संसद गठित कर सक्रिय किया जाये तथा विद्यालय के विभिन्न कार्यो के संचालन में बच्चों की सहभागिता सुनिश्चित की जाये।
  • बच्चों में उनकी जिम्मेदारियों को पूर्ण करने हेतु समय समय पर अवलोकन, विश्लेषण तथा सहयोग करे। विश्लेषण के आधार पर जिम्मेदारियों को बांटते समय बच्चों का बदल-बदल कर चयन करें।

बच्चों द्वारा निम्नलिखित गतिविधियाँ करायी जा सकती है

(1) प्रार्थना, योग एवं व्यायाम

(2) विद्यालय प्रांगण की स्वच्छता

(3) पेयजल व्यवस्था एवं शौचालयों/ मूत्रालयों का प्रयोग

(4) कक्षा की क्रियाएँ एवं अनुशासन

(5) मध्यान्ह भोजन वितरण व्यवस्था

(6) सायंकालीन सभा

(7) खेल एवं शिक्षण कार्यो में बच्चों की जिम्मेदारी तय किया जाना

अनुश्रवण व्यवस्था

1. कार्यक्रम की जिम्मेदारी जिले स्तर पर जिला समन्वयक तथा बालिका शिक्षा हेतु खण्ड शिक्षा अधिकारी, kgbv स्तर पर वार्डेन और विद्यालय स्तर पर विद्यालय के प्रधानाध्यापक / प्रधानाध्यापिका एवं सुगमकर्ता की होगी।

2. जनपद स्तर पर एवं ब्लॉक स्तर पर नियमित बैठक कर कार्यक्रम की समीक्षा की जाये। कार्यक्रम के प्रभावी अनुश्रवण के लिये ब्लॉक व जनपद स्तर पर वाट्स एप ग्रुप बनाये जाये। मीडिया के सहयोग से भी कार्यक्रम का प्रचार प्रसार किया जाये।

सभी कार्यक्रम का अभिलेख भी तैयार किया जाय ताकि ठहराव में वृद्धि परिलक्षित हो।

मीना मंच के उद्देश्य

1. सभी बालिकाओं तक शिक्षा की महत्ता को समझाना व उन्हें विद्यालय से जोड़ना ।

2 बालिकाओं को अभिव्यक्ति हेतु एक मंच प्रदान करना।

3. बालिकाओं में नेतृत्व तथा सहयोग की भावना विकसित करना।

4. किशोरावस्था संबंधी जिज्ञासाओं की अभिव्यक्ति एवं समाधान ।

5. पढ़ना, रचनात्मक लेखन एवं चित्रण की आदत का विकास करना

6. जीवन कौशल का विकास।

7. स्वास्थ्य, पोषण एवं स्वच्छता की जानकारी तथा गांव में तत्संबंधी गतिविधियों का आयोजन ।

8. बालिकाओं के हितों के प्रतिकूल प्रचलित कुरीतियों का निवारण।

9. अपने बाल एवं महिला अधिकारों से भलीभांति परिचित होना और बताना 

मंच के गठन की प्रक्रिया

  • मंच का गठन पारदर्शी तरीके से हो जिसमें विद्यालयों की सभी बालिकाएं प्रतिभाग करें।
  • 11-18 आयु वर्ग की ऐसी सभी बालिकाएं मीना मंच की सदस्य होगी जो स्कूल जाती है / कक्षा 5 और 8 पास कर चुकी है / अथवा विद्यालय नही जाती है। मीना मंच के कुल सदस्यों में एक तिहाई सदस्य बालक होगें (केजीबीवी को छोड़कर)।
  • प्रारम्भ में मंच में 20 बच्चों को फाउण्डर मेम्बर के रूप में चयनित किया जाये, बाद में सदस्यता बढ़ाकर मंच का विस्तार किया जाये।
  • मंच के समस्त सदस्यों में से पांच बच्चों की कार्यकारिणी समिति गठित की जायेगी जिसमें एक अध्यक्ष, एक सचिव, एक कोषाध्यक्ष एवं दो सदस्य होगें।
  • कार्यकारिणी समिति का कार्यकाल एक वर्ष का होगा।
  • एक सकिय बालिका को मीना प्रेरक के रूप में चयनित किया जायेगा। मीना प्रेरक ऐसी बालिका होगी जो अभिव्यक्ति की क्षमता रखती हो।
  • विद्यालय में एक मीना मंच कक्ष विकसित किया जायेगा जहां मंच की बालिकाएं स्वतंत्र रूप से कार्य कर सकेगी।

मीना मंच के प्रमुख कार्य

1. प्रत्येक माह के अंतिम शनिवार की अपराहन मीना मंच की बैठक आयोजित की जाये। बैठक के आयोजन की जिम्मेदारी पॉवर एंजिल, प्रेरक एवं एक सकिय बालक को दी जाये।

2. सुगमकर्ता बैठक का एजेंडा बनाने व अन्य बिंदुओं पर यथा आवश्यकता सहयोग प्रदान करेंगे मां समूह की माताओं को भी बैठक में आमन्त्रित किया जाये।

बैठक में निम्नलिखित बिंदुओं पर विचार विमर्श

  • सृजनात्मक लेखन, वाद-विवाद, चित्रकला, नाटक, गीत कहानी आदि के माध्यम से विचार विमर्श किया जाये
  • साफ-सफाई, व्यक्तिगत स्वच्छता, माहवारी स्वच्छता प्रबंधन तथा किशोरावस्था संबंधी जिज्ञासाओं पर सवाल-जबाव सेनेटरी नैपकिन रखने के लिए ढक्कनदार डिब्बा तथा शौचालय के साथ इंसीनरेटर की व्यवस्था पर चर्चा सुलभ संदर्भ हेतु माहवारी स्वच्छता प्रबंधन पर चर्चा के लिये गाइड लाइन।
  • बालिकाओं की शिक्षा का महत्व पर चर्चा करते हुये ऐसी बालिकाओं के घरों में संपर्क करना जो विद्यालय नही आती हैं बालिकाओं को विद्यालयों में आ रही बाधाओं की चर्चा कर उसके निवारण की योजना बनाना।
  • उन लड़कियों की सूची तैयार करें जिनका नामांकन स्कूल में नहीं हुआ है। साथ ही उन कारणों की सूची बनायें जिनके कारण बालिकाएं विद्यालय नहीं आती हैं।
  • समाज से प्रचलित ऐसी कौन कौन सी कुरीतियां है जो बालिकाओं के हितों के प्रतिकूल है तथा इन्हें कैसे दूर किया जा सकता है ?
  • जाति प्रथा, अशिक्षा, घरेलू कार्यों में लिप्त रहना, कुपोषण, भ्रूण हत्या, बाल मजदूरी, लिंग भेद आदि।
  • स्वास्थ्य, पोषण एवं स्वच्छता की जानकारी तथा गांव व विद्यालय में तत्संबंधी गतिविधियों का आयोजन। पढ़ना, रचनात्मक लेखन एवं चित्रण की आदत का विकास करने संबंधी गतिविधि।
  • हेल्प लाइंस व इसके प्रयोग की जानकारी देना। बाल अखबारों / कॉमिक का निर्माण।

शिक्षकों की भूमिका

1. अध्यापक द्वारा बच्चों को अपनी शिकायतें लिखकर शिकायत पेटिका में डालने के लिए प्रेरित करना तथा माह के अंतिम शनिवार को एस०एम०सी० को एक महिला सदस्य के माध्यम से शिकायतों को पढ़कर उत्तर देना व उनका समाधान करना ।

2. कक्षा 5 तथा 8 में पढ़ने वाली बालिकाओं को आगे की पढ़ायी जारी रखने के लिए काउंसिलिंग करना । अंध विश्वास को दूर कर वैज्ञानिक चेतना विकसित करने हेतु गतिविधियों का आयोजन ।

3. स्थानीय बैंक, पुलिस थाना, पोस्ट ऑफिस, रेलवे स्टेशन आदि का भ्रमण कर बालिकाओं को उनके कार्यो के तरीकों की जानकारी देना। खेल-कूद, व्यायाम, योग एवं स्काउट गाइड संबंधी गतिविधियां आयोजित करना ।

4. प्राकृतिक आपदा पर बच्चों से बातचीत करना व ऐसी परिस्थिति से निपटने के लिए मॉकड्रिल करना ।

6. प्रत्येक माह बैठक कर उपस्थिति पंजिका से विद्यालय में अनुपस्थित रहने वाले बालिकाओं बुलावा टोली बनाकर बालिकाओं के घरों में जाना तथा उन्हें नियमित विद्यालय लाने के लिए प्रेरित करना। की सूची बनाना

7. बालकों में जेण्डर संवेदनशीलता विकसित करने हेतु निरंतर चर्चा परिचर्चा की जाये। समय प्रबंधन, जल प्रबंधन, स्वास्थ्य प्रबंधन आदि पर चर्चा

8. यह सुनिश्चित किया जाये कि मीना मंचों की बैठक नियमित तथा निर्धारित तिथियों में हो । समस्त कार्यवाही को रजिस्टर में अंकन करें।

पॉवर एंजिल का चयन एवं उनके दायित्व

मीना मंच की नेतृत्वकारी बालिकाओं में से प्रत्येक कक्षा के लिये 01 बालिका को पॉवर एन्जिल के रूप में चिन्हित किया जाये। पॉवर एन्जिल को उनके अधिकारों एवं दायित्व की जानकारी सुगमकर्ता द्वारा प्रदान की जाये।

पॉवर एंजिल भूमिका

  • अपनी कक्षा के प्रत्येक छात्रा से निरन्तर सम्पर्क रखेगी और अपने सहपाठिनियों को सेफ - टच / अनसेफ टच, शारीरिक मानसिक शोषण एवं यौन उत्पीड़न, उचित व्यवहार तथा कक्षा में उचित जानकारी देना।
  • किसी भी छात्रा द्वारा ऐसी किसी भी घटना से ग्रसित अथवा सामना होने पर उनके द्वारा यह सूचना पॉवर एन्जिल को दी जाएगी।
  • पॉवर एन्जिल द्वारा सम्बन्धित छात्रा को यथा परामर्श देते हुए तत्सम्बन्धित जानकारी कक्षाध्यापक / कक्षाध्यापिका तथा प्रधानाध्यापक / प्रधानाध्यापिका को दी जाएगी।
  • कक्षाध्यापक / कक्षाध्यापिका तथा प्रधानाध्यापक / प्रधानाध्यापिका द्वारा समस्या का समाधान करते हुए अग्रेतर कार्यवाही की जाएगी।
  • ऐसी बालिकाएं जो प्रायः विद्यालय में अनुपस्थित रहती हैं, उनको विद्यालय में नियमित उपस्थिति हेतु कार्ययोजना बनाते हुए तथा उनके अभिभावकों से संपर्क करते हुए उनकी समस्या का समाधान करें।
  • समय-समय पर पॉवर एन्जिल को विद्यालय के सुगमकर्ता / जिला समन्वयक बालिका शिक्षा द्वारा पृथक से मार्गदर्शन प्रदान किया जाए। मीना सभा में इस सम्बन्ध में बालिकाओं को आवश्यक जानकारियां प्रदान की जाये।

मीना दिवस का आयोजन 

1. प्रत्येक वर्ष 24 सितम्बर को मीना दिवस के रूप में मनाया जाता है अतः इस दिवस पर मीना मंच की बालिकाओं द्वारा विद्यालयों में मीना दिवस को उत्सव के रूप में मनायें।  

2. मीना दिवस का आयोजन के लिए अध्यापिका को सुगमकर्ता के रूप में नामित किया जाये। विद्यालय में महिला अध्यापिका न होने की दशा में सक्रिय पुरुष अध्यापक का चयन किया जाये।

3. सुगमकर्ता का यह दायित्व होगा कि वह मीना मंच सम्बन्धी समस्त गतिविधियों का आयोजन करायें, कार्यक्रम का दस्तावेजीकरण करें। मीना मंच की गतिविधियों में प्रतिभाग करने से बच्चों से संबंधित विवरण बनाया जाय।

4. मीना मंच के सुगमकर्ता की प्रत्येक त्रैमास बीआरसी स्तर पर बैठक कर कार्यक्रम की गहन समीक्षा हो । बैठक में मीना मंच द्वारा किए गये कार्यों की समीक्षा तथा आगामी तीन माह की योजना तैयार की जाये।

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