टैबलेट_विशेष---विरोध करें अथवा स्वीकार करें, पढ़े ये लेख

 



➡️अब समय आ गया है कि प्रदेश के समस्त संघ एक साथ आवाज़ में विरोध करते हुए टैबलेट वितरित हो चुके जनपदों में टैबलेट वापस बी आर सी पर जमा करें और जहाँ नहीं वितरित हुआ है वहाँ के शिक्षक न रिसीव करें।


➡️दोनों गुटों के प्रदेश अध्यक्ष माननीय श्री दिनेश शर्मा जी और माननीय सुशील पांडेय जी,यदि इस बार आप विरोध नहीं कर पाए तो यक़ीन मानिये संघ की विश्वसनीयता समाप्त हो जायेगी। हजारों शिक्षक प्रतिवर्ष सरकार की नीतियों के कारण काल के गाल में समायेंगे।


➡️आप दोनों लोग प्रदेश अध्यक्ष मात्र इसलिए नहीं बने हैं कि आपके एक बार बुलाने पर हम शिक्षक लखनऊ अथवा कहीं भी पहुँच जाएँ। यदि आप अध्यक्ष हैं तो लाखों शिक्षकों की अपेक्षाएं आपसे हैं।


➡️इस स्थिति में आप सरकार से सीधे कहिये।


➡️पहले हमारी माँगे स्वीकार की जाएँ तब हम टैबलेट से उपस्थिति देंगे अथवा नहीं।


1️⃣.अन्तः जनपदीय पारस्परिक स्थानांतरण में कार्यमुक्ति तत्काल प्रभाव से की जाए।


2️⃣.अंतर्जनपदीय पारस्परिक स्थानांतरण की समस्त कार्यवाही पूर्ण की जाए।


3️⃣.17140 का विवाद समाप्त किया जाए।।


4️⃣.हमारी ई.एल और सी.एल की संख्या में वृद्धि की जाए।


5️⃣.कैशलेस सुविधा से हमें आच्छादित किया जाए।


6️⃣. हम शिक्षकों को हॉफ़ सी एल दिया जाए।


⏩वर्षों से हम शिक्षक एक ही जनपद में पड़े हुए हैं,50-120 किमी० बाइक चलाकर हम सेवा दे रहे हैं फिर भी हमारी सुध लेने वाला कोई नहीं है।


⏩बहुत से शिक्षक साथी एक जनपद से दूसरे जनपद में सेवा देने के लिए प्रतिदिन आते हैं,प्रायः वे दुर्घटना का शिकार हो रहे हैं। कौन उत्तरदायी है उनकी मौतों का...? सरकार ने उनको इतनी भी सुविधा देना उचित नहीं समझा कि वे अपना इलाज़ करा सकें।


⏩इस स्थिति में विरोध का प्रथम स्वर संघ की ओर से उठना चाहिए। यदि विरोध नहीं किया गया तो हम प्रदेश के समस्त शिक्षक संघ की सदस्यता त्याग देंगे।।


⏩हम शिक्षक एक-एक बूंद बनकर संघ को सागर का रूप देते हैं।


⏩एक दिसम्बर बहुत दूर नहीं है। हम शिक्षक हैं कोई बंधुवा मज़दूर नहीं हैं।


लेख - दिग्विजय जी.....🙏