शिक्षकों के जबरदस्त विरोध के चलते नहीं शुरू हो सकी टैबलेट वाली नई व्यवस्था, परम्परागत रजिस्टरों पर ही काम



 शिक्षकों के विरोध के कारण सोमवार को पहले ही दिन परम्परागत रजिस्टरों की जगह टैबलेट का प्रयोग नहीं हो सका। बेसिक शिक्षा विभाग ने प्रदेश के सात जिलों लखनऊ, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, हरदोई ,उन्नाव, रायबरेली एवं श्रावस्ती में प्रयोग के तौर पर 20 नवम्बर से 12 पंजिकाओं की जगह टैबलेट इस्तेमाल करने की डेट लाइन तय की थी। स्कूलों में उन्हें आवंटित एक से दो टैबलेट दे भी दिए जा चुके हैं लेकिन शिक्षकों के भारी विरोध के कारण आज से यह प्रारम्भ नहीं हो सका। हालांकि विभाग की ओर से भी टैबलेट संचालित करने के लिए जो कम्पोजिट ग्रांट दिए जाने की घोषणा की गई थी, वह भी स्कूलों को अभी तक नहीं भेजा जा सकी है।


स्कूल शिक्षा महानिदेशक विजय किरन आनंद की ओर से 10 नवंबर को जारी पत्र में बेसिक स्कूलों की पंजिकाओं के डिजिटाइजेशन के निर्देश दिए गए थे। निर्देश में टाइम एंड मोशन स्टडी के आधार पर शैक्षिक कार्यों के लिए समय अवधि एवं अन्य कार्यों के साथ-साथ विद्यालय स्तर पर प्रयोग की जानी वाली 12 पंजिकाओं को डिजिटाइजेशन के निर्देश थे। इसके तहत प्रेरणा पोर्टल पर स्कूल की उपस्थिति पंजिका, प्रवेश पंजिका, कक्षावार छात्र उपस्थिति पंजिका, एमडीएम पंजिका, समेकित निशुल्क सामग्री वितरण पंजिका, स्टाक पंजिका का अपलोड कर आनलाइन ही पूरा विवरण दर्ज किया जाना है। इसके लिए सभी विद्यालयों को टैबलेट भी प्रदान किए गए हैं। फिलहाल सात जिलों में इसे 20 नवम्बर से प्रयोग के रूप में शुरू किया जाना था लेकिन शिक्षकों के विरोध के कारण आज यह शुरू नहीं हो सका।